Thursday, January 22, 2015

प्रेरणा के महान स्रोत - स्वामी विवेकानंद

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एक  दिन  एक  अंग्रेज  मित्र  के  साथ   किसी  मैदान  में टहल  रहे  थे।  उसी  समय  एक  पागल  सांड  तेजी  से उनकी  ओर  बढ़ने  लगा।

अंग्रेज  अपनी  जान  बचाने  को  जल्दी  से  भागकर पहाड़ी  के  दूसरी  छोर  पर  जा  खड़े  हुए। स्वामी जी  ने  यह  सब  देखा  और  उन्हें  सहायता  पहुंचाने  का कोई  और  उपाय  न  देखकर  वे  सांड  के  सामने   खड़े  हो  गए  और  सोचने  लगे अंत  आ  ही  पहुंचा।

बाद  में  उन्होंने  बताया  था  कि  उस समय  उनका  मन हिसाब  करने  में  लगा  हुआ  था  कि सांड   उन्हें कितनी  दूर  फेंकेगा।

परंतु  कुछ  कदम  बढ़ने   के  बाद  ही  वह  ठहर  गया और  अचानक  ही  अपना  सिर  उठाकर  पीछे  हटने  लगा।  स्वामी  जी  को  पशु  के  समक्ष  छोड़कर  अपने कायरता  पूर्ण   भाग  जाने  पर  वे  अंग्रेज  बड़े  लज्जित  हुए।

ऐसी  खतरनाक  परिस्थिति  से  सामना  करने  का साहस  कैसे  जुटा  सके।  स्वामी  जी  ने  पत्थर  के  दो टुकड़े  उठाकर  उन्हें  आपस  में  टकराते  हुए

कहा  कि  खतरे  और  मृत्यु  के  समक्ष  वे  अपने  को चकमक  पत्थर  के  समान  सबल  महसूस  करते  हैं क्योंकि  मैंने  ईश्वर  के  चरण  स्पर्श  किए  हैं।