Saturday, May 23, 2015

ग्राहक की   संतुष्टि

(प्रेरक प्रसंग कहानियाँ)Great Moral Stories in Hindi Language,hindi short moral stories

एक  किसान  का  एक  ही  बेटा  था।  वह  नौ-दस  साल  का  हुआ  तो  किसान  कभी-कभार  उसे  भी अपने  साथ  खेत  में  ले  जाने  लगा।

एक  बार  वह  अपने  बेटे  को  खेतलेकर  गया  तो  भुट्टे  पक  चुके  थे। किसान  उन्हें  तोड़कर   बाजार  ले  जाने
की  तैयारी  करने  में  जुट  गया।

तभी उसके  बेटे  ने पिता  से  कहा- 'पिताजी,
क्या  मैं  भी आपकी  कुछ  मदद  कर  सकता
हूं?'  इस  पर  किसान  ने  कहा-'हां-हां।

ऐसा  करते  हैं, मैं  खेत  से  भुट्टे  तोड़-तोड़कर  निकालता  जाऊंगा  और  तुम  एक-एक  दर्जन  भुट्टों  की  अलग-अलग ढेरियां  बनाते  जाना।'


इसके  बाद  वे  दोनों  काम  पर  जुट  गए। दोपहर  का खाना  खाने  के  बाद किसान  ने  बेटे  द्वारा  बनाई  ढेरियों  पर  नजर  दौड़ाई  और  कुछ  और
तोड़  लाया। उसने  हर  ढेरी  में  एक-एक  भुट्टा और  बढ़ा  दिया।

यह  देख  किसान  का  बेटा  बोला-'पिताजी,  मुझे
गिनती  आती  है। मैंने  हर  ढेरीमें  गिनकर  बारह  भुट्टे ही  रखे  हैं। अब  तो  ये  तेरह. हो  गए।'

किसान  ने  मुस्कराते  हुए  कहा-'बेटा,  तुम
ठीक  कहते  हो,  लेकिन  जब  हम  भुट्टे  बेचने  निकलते
हैं  तो  एक  दर्जन  में  तेरह  भुट्टे  होते  हैं।'


बेटे  ने  पूछा-'ऐसा  क्यों  पिताजी ?'
 किसान  ने  समझाया-'देखो,
भुट्टे  के  ऊपर  छिलका  होता  है। हमारे  ढेर  में  एक भुट्टा  खराब भी  निकल  सकता  है। इसलिए  हम ग्राहकों  को  दर्जन  पर  एक  भुट्टा अतिरिक्त  देते  हैं ताकि  हमारे  ग्राहक  ये  न समझें  कि  हमने  उन्हें  धोखा  दिया।

 हम  चाहते  हैं  कि  हमारा  ग्राहकसंतुष्ट  होकर  दूसरों को  भी  बताए  कि  भुट्टे  कितने  अच्छे  हैं। इस  तरह हमारे  भुट्टे  और  ज्यादा  बिकेंगे।'

पिता  की  इन  बातों  से  बेटे  को  कारोबार  का  एक अहम  सबक  मिल  गया- ग्राहक. की  संतुष्टि  सर्वोपरि है।