Sunday, February 14, 2016

स्वामी विवेकानन्द : लोगो की पहचान

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 स्वामी विवेकानन्द  :   लोगो  की  पहचान 



एक    बार  स्वामी  विवेकानन्द  ने  एक  शिष्य  को  पास  बुलाकर  कहा- 'तुम  शहर  में  जाकर  पता लगाओ  कि  ऐसे  कितने  लोग  हैं, जिन्हें  बुरे  की  श्रेणी  में  रखा  जा  सकता  है।'
शिष्य  ने  कहा- 'जो  आज्ञा  गुरु  जी ।' इतना  कहकर  शिष्य  वहाँ  से  चला  गया।

थोड़ी  ही  देर  में  स्वामी  विवेकानन्द  ने  दूसरे  शिष्य  को  आवाज  लगाई-
दूसरा  शिष्य  उपस्थित  हुआ  और  हाथ  जोड़कर  खड़ा  हो  गया  और  कहने  लगा- 'गुरु  जी, आपने  मुझे पुकारा  था, कहिए  क्या  आदेश  हैं?'

स्वामी  विवेकानन्द  ने  कहा- 'तुम  शहर  में  जाकर  मालूम  करो  कि  अच्छे  लोगों  का  प्रतिशत  कितना है?' दूसरा  शिष्य  सिर  झुकाकर  बोला- 'जो  आज्ञा  गुरु  जी' और  आदेश  का  पालन  करने  निकल  गया। दोनों  शिष्य  स्वामी विवेकानन्द  के  बताए  कार्य  पर  विस्तृत  अध्ययन  करके  एक  के  बाद  एक लौटे। 


पहले  शिष्य  ने  आकर  अपने  आकलन  का  सार  प्रस्तुत  किया  और  बोले- 'गुरु  जी ! मुझे  तो  शहर में बहुत  ढूंढने  पर  भी  कोई  बुरा  व्यक्ति  नहीं  मिला।' 

स्वामी विवेकानन्द  जी  ने  कहा- 'अच्छा,  तुम  अब  जाओ।' कुछ  देर  के  बाद  दूसरा  शिष्य  उपस्थित हुआ  और  स्वामी विवेकानन्द  जी  को  प्रणाम  करके  बोला- 'गुरु जी ! मैंने  राजधानी  में  अच्छे  लोगो  की गहन  खोज-पड़ताल  की,  लेकिन  ऐसा  लगा  कि  यहां  अच्छे  लोगो  का  अकाल  पड़  गया  है।'
यह  सुन  कर  स्वामी विवेकानन्द  जी  मुस्कराए। फिर  उन्होंने  सभी  शिष्यों  के  साथ  इन  दोनों शिष्यो के  निष्कर्षों  की  व्याख्या  की।


  शिक्षा - स्वामी विवेकानन्द   ने  कहा- 'चूंकि  जो  अच्छे  हैं  अतः  उन्हें  सभी  लोग  अच्छे  ही  नजर आते  हैं। यहां तक  कि  बुरे  लोगो  में  भी  अच्छे  लोगो  के  गुण  दिखाई  देते  हैं। उसी  कारण  उन्हें  कोई  बुरे  व्यक्ति नहीं  मिलाते ।दूसरी  ओर  दूसरे  शिष्य  को  कोई  अच्छे  पुरुष  नजर  नहीं  आया, क्योंकि  उनकी  रुचि अच्छे  लोगो  में  जरा  भी  नहीं  थी ।'