Saturday, February 20, 2016

स्वामी विवेकानन्द :किन लोगों पर भरोसा करें

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 स्वामी विवेकानन्द :किन लोगों पर भरोसा करें  


आश्रम  में  शिष्यों  की  शिक्षा  पूरी  हो  चुकी  थी  और  उनका  आखिरी  दिन  था | आश्रम  के  नियम  अनुसार  स्वामी विवेकानन्द  अपने  शिष्यों  को  आखिरी  संदेश  देने  जा  रहे  थे | जब  सारे  शिष्य आश्रम  में  जमा  हो  गये  तो  स्वामी विवेकानन्द  ने  अपना  संदेश  देना  आरंभ  किया | स्वामी विवेकानन्द के  पास  में लकड़ी  की  तीन  मूर्ति  थी |

उन्होंने  शिष्यों  को  वो  तीनो  मूर्ति  दिखाते  हुए  कहा  “मेरे  पास  में  ये जो  तीनो  मूर्ति  है आप  शिष्यो को  इन  तीनों   में  से  अंतर  ढूढ़ना  है ”  स्वामी विवेकानन्द  की  आज्ञा  सुन  शिष्य  ने  बड़े  ध्यानपूर्वक मूर्ति  को  देखने  लगे |  तीनों मूर्ति  बिलकुल  एक  ही  सामान  दिखती  थी  | मूर्ति  में  अंतर  ढूढ़ना  बहुत  कठिन  था |तभी  एक  शिष्य  ने  एक  छेद  को  देखते  हुए  बोला  “ देखो  इस  मूर्ति  में  छेद  है|” यह  काफी  था  फिर  सारे  शिष्यों ने  एक  एक  करके  उन  तीनों  मूर्ति  में  अंतर  खोज  लिया | तो  सभी  शिष्यो ने  स्वामी विवेकानन्द  से  कहा  कि  स्वामी जी  इस  मूर्ति  में  बस  यही  एक  अंतर  है  एक  मूर्ति  के  कानों  में  छेद  है | दूसरी  के  मुहं  में  और तीसरी  मूर्ति के  कान  में  छेद  है  और  एक  के  केवल  एक  कान  में  छेद  है | उनको  सुन  कर  स्वामी विवेकानन्द  ने  कहा  बिलकुल  सही  कहा।

 शिक्षा - अब  स्वामी विवेकानन्द  ने  शिष्यों  को  एक  पतला  तार  देते  हुए  उसे  छेद  के  कान  में  डालने  को  कहा | शिष्यों  ने  वैसा  ही  किया  तो  एक  मूर्ति  के  छेद  के  कान  से  होते  हुए   तार  दूसरे  कान  से  निकला  | एक  और मूर्ति  के  कान  से  होकर  तार  मुहं  से  निकला | जबकि  एक  के  कान  में  तार  डालने  पर  वह  कही  से  भी  नहीं निकला | स्वामी विवेकानन्द   ने  शिष्य  को  समझाया  कि  देखो  इसी  तरह  के  तुम्हे  अपनी  जिन्दगी  में  तीन  तरह  के लोग  मिलेंगे | पहले  वो  जिनसे  अगर  तुम  कुछ  कहते  हो  तो  वह  एक  कान  से  सुन  दूसरे  कान  से  निकाल  देते  है ऐसे  लोगो  के  साथ  कोई  भी  बात  तुम  मत  बताना  | दूसरे  वो  लोग  होंगे  जो  तुम्हारी  बातों  को  सुनकर  किसी और  के  पास  जाकर  बोलेगें  ऐसे लोगों  से  कोई  भी  जरूरी   बात  मत बताना  और  तीसरे  वो लोग  होंगे  जिनसे  तुम  कोई  भी  बात  बोलोगें  जिन  पर  तुम  भरोसा  कर  सकते  हो  उसी  तीसरी  मूर्ति  की  तरह  और  उन  से  तुम किसी  भी  बात  के  लिए  सलाह  ले  सकते  हो | बस  आपको  लोगो  की  सही  परख  का  होना बहुत  जरूरी  है !